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लेखनी प्रतियोगिता -27-Aug-2022

शुरू हुआ एक किस्सा ऐसा 
साजिश का था जो हिस्सा

चहुं ओर घनेरी रात थी जब
उससे हुई मुलाकात थी तब 

नजरो से नज़रे टकराई
ये क्या हो गया राम दुहाई

इश्क हुआ एक परवाने से
हां वही कही एक दीवाने से

नही पता था सब धोका है
ये जो चल बस झोका है

हा झोका उसके छलावे का
प्यार के उसके दिखावे का

आई एक दिन आंधी ऐसी
बारिश में तुफानो  जैसी

उसने केवल फरेब किया था
इश्क नहीं कोई खेल किया था

उसके लिए मैं मात्र खिलौना
पर उससे था मेरा जीवन जीना

जिस्मों का वो करता व्यापार
पर रूह को मेरी उससे प्यार

मुझको उसने ऐसे तोड़ा
मानो कोई मिट्टी का खिलौना

उससे नहीं था शायद  कोई मेल 
इसलिए खेला उसने ये  खेल

सिलसिला ये उसका जग जाहिर था
दिल तोड़ने में वो माहिर था

फिर भी मुझे नहीं दिखाई दी
उसने फरेब की खूब गवाही दी

जब अंदर से उसने झकझोरा 
तो समझी मैं की उसने मुझे है तोड़ा

                              श्रद्धा पाण्डेय 

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28 Comments

Abhinav ji

28-Aug-2022 11:00 PM

Very nice

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Shraddha Pandey

29-Aug-2022 07:57 AM

TQ🤩

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Ajay Tiwari

28-Aug-2022 05:30 PM

Very nice

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Shraddha Pandey

29-Aug-2022 07:56 AM

TQ☺️

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वाह Outstanding बहुत बहुत बहुत खूबसूरत सृजन

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Shraddha Pandey

28-Aug-2022 10:24 AM

Aapka bahut bahut dhanyawad 🤩

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